Posts

मुझे अब डर नहीं लगता ............!

मुझे अब डर  नहीं  लगता किसी  के  दूर  जाने  से ताल्लुक टूट  जाने  से किसी के मान जाने से किसी  के रूठ जाने से मुझे अब डर नहीं लगता किसी  को अजमाने से किसी के अजमाने से किसी को याद रखने से किसी को भूल जाने से मुझे अब डर नहीं लगता किसी  को  छोड़ देने से किसी  के छोड़ जाने से न  शमा  को  जलाने  से न  शमा को बुझाने से मुझे अब डर नहीं लगता अकेले  मुस्कराने  से कभी  आंसू  बहाने  से न  इस सारे ज़माने से हकीकत  से  फ़साने  से मुझे अब डर नहीं लगता किसी की नारसाई से किसी  की  परसाई  से किसी  की  बेवफाई से किसी  दुःख  इंतेहाई से मुझे अब डर नहीं लगता न  तो इस पार रहने से न तो उस पार रह...
ना थी  जिसको  मेरे  प्यार  की  कदर, इत्तेफाक  से  उसी  को  छह  रहा  था  मैं, उसी  दिए  ने  जलाया  मेरे  हाथों  को, जिसको  हवा  से  बचा  रहा  था  मै……..
आज  उदास  हूँ  तो ज़माना  मुझे  पूछने   आया  .. मगर  जिस  पे  था  सदियों  का  भरम  वो   नहीं  आया .. वो  तो  एक  ख्वाब था  टूट  गया  बिखर  गया  है .. आज उदास  लम्हों  में फिर क्यों मुझे वो  याद आया ..  ज़िन्दगी  की  मुसफत  के  वो चन्द दिन  जो  गुज़र  चुके  हैं .. न  ही  उन  पे  उरूज  आया ,और  न  ही  उन  पे  ज़वाल  आया ... भूलना  चाहता  हूँ  हर  लम्हा , हर  वक़्त  जो  गुज़र  गया  है .. जितना  भी  रोका  वोह  वक़्त  उतना मेरे साथ  चला आया ... गुज़रा  हुआ  कल  न  था  मेरा, न  है  मेरा  और न  होगा  कभी ... यह  में  जानता  हूँ  मगर  फिर  भी  न  दिल  को  करार  आया .. वोह...
जब नरम गुलाबी होंठो से हिम का सा हास बिखर जाये रसियाते राते गालों पर तन का मधुमास बिखर जाये ! जब सारे शब्दों  की भाषा 'हाँ' 'ना' में अटकती हो अंगो से होकर अंगो तक चन्दन की बास लिपटती हो ! तब नीति नियम सिर पर बोलें, तब दूर क्षितिज पर मन डोले मुझको तो ऐसे योवन की सौगात असंभव लगती है !!!    
क्या छुपा के लाया था किसका नाम लिक्खा  था दफन हो गया लेकिन मुट्ठियाँ नहीं खोलीं !! इस गली के लोगो की पर्दादारियां देखो  उम्र भर मकानों की खिड़कियाँ नहीं खोलीं !!  

हकीकत.............

खुली फिज़ा में पर तोलने से डरने लगे ये क्या हुआ की जुबाँ खोलने से डरने लगे ! कुछ ऐसा झूठ का जादू चला है अब के बरस  हम अपने घर में ही सच बोलने से डरने लगे !!!!

THE BARE TRUTH

कई प्रश्न ऐसे है जो बतलाये नहीं जाते कई उत्तर भी ऐसे है जो समझाए नहीं जाते बनाना चाहता हूँ स्वर्ग तक सोपान सपनो का मगर चादर से ज्यादा पाँव फैलाये नहीं जाते !!!